भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को अगले महीने नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिलने जा रहा है। इस रेस में मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान का नाम सबसे आगे माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भाजपा अध्यक्ष वही होगा, जो न सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भरोसेमंद हो, बल्कि आरएसएस की पहली पसंद भी। साथ ही संगठन चलाने और चुनावी राजनीति का अनुभव भी उसके पक्ष में होना चाहिए।
इन्हीं पैमानों पर अगर देखा जाए, तो शिवराज सिंह चौहान पूरी तरह फिट बैठते हैं। हाल ही में ग्वालियर में संघ प्रमुख मोहन भागवत के साथ उनकी बंद कमरे में हुई लंबी बैठक ने इस संभावना को और मजबूत कर दिया है। हालांकि भाजपा का अंदाज़ हमेशा अप्रत्याशित फैसलों से भरा रहा है, इसलिए अंतिम फैसला आने वाले कुछ दिनों में ही साफ होगा।
क्यों चर्चा में हैं शिवराज सिंह चौहान?
ग्वालियर में संघ प्रमुख मोहन भागवत से शिवराज की लगभग 45 मिनट की मुलाकात के बाद से सियासी गलियारों में उनकी दावेदारी चर्चा में है। जब मीडिया ने उनसे भाजपा अध्यक्ष पद की दौड़ को लेकर सवाल पूछा तो उन्होंने साफ जवाब देने से बचते हुए कहा कि – “मैंने इस बारे में कभी नहीं सोचा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो जिम्मेदारी दी है, उसी को निभा रहा हूं।”
विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह का जवाब देना ही संकेत है कि शिवराज रेस में शामिल हैं और संघ प्रमुख से उनकी मुलाकात को इसी पद से जोड़कर देखा जा रहा है।

शिवराज की दावेदारी क्यों है मजबूत?
✔ OBC नेता होने का फायदा
शिवराज सिंह चौहान अन्य पिछड़ा वर्ग से आते हैं। भाजपा की राजनीति में यह वर्ग बेहद निर्णायक माना जाता है। उनकी यह पृष्ठभूमि उन्हें स्वाभाविक बढ़त देती है।
✔ संगठनात्मक अनुभव
युवा मोर्चा से राजनीति की शुरुआत कर वे राष्ट्रीय स्तर तक संगठन के कई अहम पदों पर रह चुके हैं। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष से लेकर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तक वे हर स्तर पर संगठन को संभाल चुके हैं।
✔ पार्टी में टॉप-5 की स्थिति
केंद्र सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में शिवराज ने पांचवें नंबर पर शपथ ली थी। उनसे पहले सिर्फ मोदी, अमित शाह, राजनाथ सिंह और जेपी नड्डा थे। इनमें से नड्डा, शाह और राजनाथ पहले ही अध्यक्ष रह चुके हैं। ऐसे में शिवराज का नंबर स्वाभाविक लगता है।
✔ सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने का अनुभव
शिवराज सिंह लगभग 18 साल तक मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। इस दौरान उन्होंने लाडली लक्ष्मी योजना और लाडली बहना योजना जैसी स्कीमें शुरू कीं, जिन्होंने भाजपा का वोटबैंक मजबूत किया। यही योजनाएं बाद में अन्य राज्यों में भी लागू की गईं।
✔ विवादों के बावजूद लोकप्रियता बरकरार
मुख्यमंत्री रहते उन पर डंपर कांड और व्यापमं जैसे आरोप लगे, लेकिन इन विवादों ने उनकी जनछवि को नुकसान नहीं पहुंचाया। 2008 और 2013 के चुनावों में भाजपा को उन्होंने बड़ी जीत दिलाई।
✔ सरल और सहज छवि
शिवराज की सबसे बड़ी ताकत उनकी ‘मामा’ वाली पहचान है। वे जमीनी स्तर के कार्यकर्ता से लेकर बड़े नेताओं तक सबको समान सम्मान देने के लिए जाने जाते हैं। जनता से जुड़ने की उनकी भाषा और सहज व्यवहार उन्हें अन्य नेताओं से अलग बनाता है।
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