भोपाल/मध्य प्रदेश न्यूज़ — मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में बड़ा दावा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में करीब 16 लाख वोटों का हेरफेर हुआ, जिसके चलते कांग्रेस को 27 सीटों पर बहुत कम अंतर से हार का सामना करना पड़ा।
सिंघार ने कहा कि चुनाव से पहले महज़ दो महीनों में कई विधानसभा क्षेत्रों में 7 से 10 हजार तक वोटर बढ़े। यही कारण रहा कि जहां कांग्रेस प्रत्याशी 5-6 हजार वोटों के अंतर से हारे, वहां अचानक 10-11 हजार वोट बढ़ा दिए गए।
“फर्जी जनादेश से बनी भाजपा सरकार”
सिंघार ने आरोप लगाया कि भाजपा ने वोट चोरी कर फर्जी जनादेश के आधार पर सरकार बनाई। उन्होंने चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठाए और कहा कि आयोग ने भाजपा को सरकार बनाने में अहम सहयोग दिया।
वोटर लिस्ट न देने का मामला
नेता प्रतिपक्ष ने खुलासा किया कि चुनाव आयोग ने 9 जून 2023 को छत्तीसगढ़, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, मिजोरम और राजस्थान के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारियों को आदेश दिया था कि 30 जून के बाद हटाए या बढ़ाए गए वोटरों की लिस्ट किसी को उपलब्ध न कराई जाए और न ही वेबसाइट पर डाली जाए। सिंघार ने कहा कि यह निर्णय पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है।
तीन साल तक डेटा रखने का नियम तोड़ा गया
सिंघार ने आगे बताया कि मप्र के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने 2 दिसंबर 2022 को आदेश जारी कर कहा था कि 8.5 लाख नकली वोटर हटाए जाएंगे। लेकिन जब इस संबंध में आरटीआई के तहत जानकारी मांगी गई, तो आयोग ने कहा कि वे डिजिटल डेटा नहीं रखते। जबकि नियम 32 के अनुसार, आयोग को कम से कम तीन साल तक डेटा सुरक्षित रखना अनिवार्य है।

“मतदाता सूची में फोटो क्यों नहीं?”
उमंग सिंघार ने चुनाव आयोग पर एक और सवाल उठाते हुए कहा कि मतदाता सूची में फोटो शामिल न करने के लिए आयोग ‘गोपनीयता’ और ‘फाइल साइज’ का बहाना देता है। उन्होंने तर्क दिया कि जब सरकार अपनी योजनाओं में लाभार्थियों के बड़े-बड़े फोटो और वीडियो सार्वजनिक करती है, तो पारदर्शिता के लिए मतदाता सूची में फोटो क्यों नहीं जोड़े जा सकते?


