मध्यप्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र 2025 के दौरान एक ऐतिहासिक निर्णय लिया गया, जिसमें उज्जैन स्थित Vikram University का नाम बदलकर सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय करने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हुआ। यह निर्णय सोमवार को उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार द्वारा पेश किए गए मध्यप्रदेश विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक 2025 के अंतर्गत लिया गया।
यह संशोधन विधेयक जब सदन के पटल पर रखा गया तो सत्ता पक्ष के साथ-साथ विपक्षी सदस्यों ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया। सभी ने एकमत से यह स्वीकार किया कि Vikram University का नाम भारतीय इतिहास के महान सम्राट विक्रमादित्य के नाम पर रखा जाना गर्व की बात है।
ऐतिहासिक पहचान को मिला नया सम्मान
Vikram University, जिसकी स्थापना 1957 में उज्जैन में हुई थी, भारतीय शिक्षा और संस्कृति का एक प्रमुख केंद्र रहा है। सम्राट विक्रमादित्य का उज्जैन से गहरा ऐतिहासिक जुड़ाव है। इस निर्णय को न केवल सांस्कृतिक गौरव से जोड़ा जा रहा है, बल्कि इसे स्थानीय पहचान को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम भी माना जा रहा है।
विश्वविद्यालयों में होंगे नियमित दीक्षांत समारोह
उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने सदन को यह भी बताया कि राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में अब नियमित दीक्षांत समारोह आयोजित किए जाएंगे। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अनुसार कॉलेजों में भर्ती की जा रही है और अतिथि विद्वानों को बाहर नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि जिन महाविद्यालयों में छात्र संख्या अधिक है, वहां बहुसंख्यक पद रखे जाएंगे ताकि छात्रों को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा मिल सके।

विपक्ष का भी समर्थन
विपक्षी दलों ने इस विधेयक को लेकर सकारात्मक रवैया अपनाया और कहा कि Vikram University का नाम बदलने का यह फैसला लंबे समय से प्रतीक्षित था। यह उज्जैन और पूरे मालवा क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का प्रयास है।
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