रतलाम। दिल्ली-मुंबई रेल कॉरिडोर पर ट्रेनों की स्पीड और संचालन क्षमता बढ़ाने के लिए रेलवे ने मिशन रफ्तार के तहत काम तेज कर दिया है। इसी क्रम में Ratlam Railway Mandal के नागदा से गोधरा सेक्शन में ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग सिस्टम (ABSS) लगाया जा रहा है। रेलवे ने रतलाम से नागदा के बीच लगभग 38 किलोमीटर लंबे सेक्शन में इसका इंस्टॉलेशन पूरा कर लिया है।
इंजीनियरों ने किया निरीक्षण
वेस्टर्न रेलवे हेडक्वार्टर से आई इंजीनियरों की टीम ने मंगलवार को रतलाम-नागदा सेक्शन में लगे एबीएस सिस्टम का निरीक्षण किया। टीम ने विशेष निरीक्षण यान से रतलाम से नागदा तक जाकर उपकरणों की लोकेशन और फंक्शनलिटी चेक की। इस दौरान कुछ छोटी तकनीकी खामियां मिलीं, जिन्हें दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट मुख्यालय को सौंपी जाएगी और अप्रूवल के बाद इस सेक्शन में सिस्टम की कमिशनिंग कर दी जाएगी।
कैसे काम करता है ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग सिस्टम
- इस प्रणाली में हर एक किलोमीटर पर सिग्नल लगाए जाते हैं।
- यदि आगे चल रही ट्रेन के सिग्नल में कोई समस्या आती है तो पीछे की ट्रेनों को अपने-आप अलर्ट मिल जाता है।
- इससे ट्रेनें सुरक्षित दूरी पर एक के पीछे एक चल सकती हैं।
- ट्रेन की लाइव लोकेशन कंट्रोल और स्टेशनों को मिलती रहती है।
यात्रियों और रेलवे को होगा फायदा
- अब ट्रेनों को आगे वाली ट्रेन के अगले स्टेशन तक पहुंचने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
- एक से दो किलोमीटर की दूरी पर दो ट्रेनें एक साथ चलाई जा सकेंगी।
- ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी और नए रूट पर अतिरिक्त ट्रेनें चलाना आसान होगा।
पहले भी लागू हो चुका है सिस्टम
अप्रैल 2025 में रेलवे ने गोधरा-दाहोद सेक्शन के कांसुधी-पिपलोद (28 किमी) ट्रैक पर यह प्रणाली लागू की थी। आने वाले 2-3 सालों में दिल्ली-मुंबई रेल कॉरिडोर पर पूरा रूट ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग सिस्टम से लैस हो जाएगा।
इन सेक्शनों में भी लगेगा ABSS
रतलाम मंडल के नागदा-भोपाल (228.14 किमी, 27 स्टेशन) और उज्जैन-इंदौर रेलखंड पर भी यह सिस्टम लगाया जाएगा। रेलवे हेडक्वार्टर ने इसके लिए सब-अम्ब्रेला वर्क के तहत मंजूरी दे दी है।


