मध्यप्रदेश के रतलाम में वर्ष 2016 की एक सनसनीखेज शादी ठगी केस में अदालत ने मुख्य आरोपी फर्जी दुल्हन मोना पारिक को दोषी करार देते हुए तीन साल का सश्रम कारावास और 5,000 रुपये का जुर्माना सुनाया है।
इस मामले में पीड़ित युवक से शादी के नाम पर न सिर्फ धोखा किया गया, बल्कि उसकी आंखों में मिर्ची झोंककर लाखों की नकदी और जेवर भी लूट लिए गए थे।
शादी के नाम पर साजिश: कैसे फंसा भोला युवक?
सहायक अभियोजन निदेशक आशा शाक्यवार के अनुसार, यह मामला 2016 का है, जब ग्राम कांकरा निवासी मुकेश टांक को एक फर्जी शादी गिरोह द्वारा निशाना बनाया गया। मुकेश को एक भरोसेमंद जीवनसाथी की तलाश थी, लेकिन आरोपियों ओमप्रकाश, हसीना बी और कचरू ने उसे झांसे में लेकर इंदौर निवासी मोना पारिक से शादी करवा दी।
शादी के कुछ ही दिनों बाद, 17 अप्रैल 2016 को मुकेश जब अपनी पत्नी मोना को बाइक पर बैठाकर इंदौर ले जा रहा था, तब रस्ते में रची गई साजिश का खुलासा हुआ। मोना ने मुकेश की आंखों में मिर्ची पाउडर झोंक दिया और करीब ₹2 लाख नकद और ₹1 लाख के गहने लेकर फरार हो गई।

सात लोगों की साजिश, अब भी कई आरोपी फरार
घटना के बाद मुकेश ने दीनदयालनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई, जिसके आधार पर फर्जी शादी व धोखाधड़ी की धाराओं में केस दर्ज हुआ। जांच में सामने आया कि यह एक संगठित अपराध था, जिसमें मोना पारिक के अलावा उसके भाई राजेश पारिक, साथी शीला उर्फ छाया, अभिषेक सोनी सहित कुल सात लोग शामिल थे।
- मुख्य आरोपी मोना पारिक को तीन साल की सजा
- शीला उर्फ छाया दोषमुक्त
- कचरू की मृत्यु
- ओमप्रकाश, हसीना बी, राजेश पारिक और अभिषेक सोनी अब भी फरार, भगोड़ा घोषित
न्याय की उम्मीद: केस का अंत या नई शुरुआत?
प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट आकांक्षा गुप्ता की अदालत ने सोमवार को यह फैसला सुनाया। अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक कृष्णकांत चौहान ने केस की मजबूती से पैरवी की।
इस घटना ने फिर से यह साबित किया कि शादी के नाम पर ठगी एक गंभीर सामाजिक अपराध बनता जा रहा है, जिसमें भोलेभाले युवक-युवतियों की ज़िंदगी को टारगेट किया जा रहा है।


