Ratlam Groundwater Crisis मध्यप्रदेश में जल संकट की नई तस्वीर पेश कर रहा है। हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, रतलाम जिले में भूजल दोहन 134.03% तक पहुंच गया है, जो राज्य में सबसे अधिक है। यह स्थिति जिले के जल स्रोतों पर अत्यधिक दबाव और भविष्य में गंभीर जल संकट का संकेत देती है।
रतलाम में हालात सबसे भयावह
Ratlam Groundwater Crisis के आंकड़े बताते हैं कि जिले में जितना भूजल रिचार्ज हो रहा है, उससे कहीं अधिक निकाला जा रहा है। पड़ोसी जिलों की बात करें तो नीमच (101.53%) और मंदसौर (101.81%) भी खतरे के निशान को पार कर चुके हैं। वहीं, इंदौर (118.84%) और उज्जैन (106.54%) जैसे शहरी जिले भी गंभीर स्थिति में हैं।

पश्चिमी मध्यप्रदेश बना जल संकट का केंद्र
रतलाम सहित पश्चिमी मध्यप्रदेश के कई जिले — जैसे शाजापुर (104.15%), धार (65.9%) और देवास (78.96%) — भूजल दोहन के मामले में चिंताजनक स्थिति में हैं। जबकि ग्वालियर (33.47%), जबलपुर (52.4%) और बालाघाट (29.0%) जैसे पूर्वी व दक्षिणी जिले अपेक्षाकृत सुरक्षित स्थिति में हैं। इससे साफ है कि जल संकट का प्रभाव क्षेत्रीय रूप से असमान है।
जल संरक्षण कानूनों की कमी और लचर अमल
भले ही कुछ इलाकों में Rainwater Harvesting अनिवार्य किया गया है, लेकिन इसकी जमीनी हकीकत बेहद कमजोर है। मध्यप्रदेश में अभी भी कोई सख्त Groundwater Regulation Law नहीं है, जिससे इस संकट को रोकने के प्रयास अधूरे साबित हो रहे हैं।
जल सुरक्षा के लिए जरूरी है तत्काल हस्तक्षेप
जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के कारण भूजल पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। यदि Ratlam Groundwater Crisis जैसे हालात पर तुरंत नीति और प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले वर्षों में पीने के पानी और सिंचाई के लिए गहराता संकट सामने आ सकता है।
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