रक्षाबंधन सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति का एक भावनात्मक और ऐतिहासिक प्रतीक है। हर वर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाने वाला यह त्यौहार भाई-बहन के प्रेम और सुरक्षा के अटूट बंधन का उत्सव है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि राखी का इतिहास केवल पारिवारिक प्रेम तक सीमित नहीं है? यह पर्व भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का भी एक अहम सांस्कृतिक अस्त्र रहा है।
रक्षा बंधन का पौराणिक-सांस्कृतिक आरंभ
- प्राचीन भारतीय कथाओं में राखी का उल्लेख मिलता है। महाभारत में द्रौपदी ने श्रीकृष्ण की उंगली से बहते रक्त को रोकने के लिए अपना आँचल बाँधा, जिससे श्रीकृष्ण ने जीवनभर रक्षा का वचन दिया।
- देवी इंद्राणी द्वारा भगवान इंद्र की कलाई पर रक्षासूत्र बाँधने की कथा भी राखी के प्रारंभिक स्वरूप को दर्शाती है।
- लोककथाओं में यह भी आस्था है कि अलेक्जेंडर की पत्नी रौक्साना ने पुरुस को राखी बाँधकर युद्ध से पहले शांति का संदेश भेजा था
स्वतंत्रता संग्राम में राखी: एक सांस्कृतिक हथियार
रवींद्रनाथ टैगोर ने 1905 में बंगाल विभाजन के विरोध में राखी आंदोलन शुरू किया।
उन्होंने हिंदू‑मुस्लिम एकता और देशभक्ति को बढ़ावा देने के लिए लोगों को आपसी रक्षा सूत्र बाँधने की अपील की।
इस आंदोलन ने लोगों में धार्मिक सीमाओं से ऊपर उठकर राष्ट्रीय एकता का संदेश जोड़ दिया और विभाजन की नीति को चुनौती दी। यह आंदोलन अंततः विभाजन वापस लेने में एक सांस्कृतिक पायदान साबित हुआ
8 अगस्त या 9 अगस्त को है रक्षा बंधन 2025 ?
श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि आरंभ– 8 अगस्त 2025 को दोपहर 2 बजकर 12 मिनट से
श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि समाप्त– 9 अगस्त को दोपहर 1 बजकर 24 मिनट पर
रक्षाबंधन 2025 तिथि-उदया तिथि के हिसाब से रक्षाबंधन 9 अगस्त 2025 को मनाया जाएगा।


