इंसानियत की अनूठी मिसाल पेश करते हुए प्रशासन, पुलिस, और समाजसेवियों की संयुक्त कोशिशों से रतलाम बुजुर्ग महिला को परिवार मिला, जो स्वास्थ्य समस्याओं और याददाश्त कमजोर होने के चलते असहाय अवस्था में जिला अस्पताल परिसर में मिली थीं। अब वे सकुशल अपने परिजनों के पास लौट चुकी हैं।
अस्पताल परिसर में मिलीं बेसहारा, गोविंद काकानी बने सहारा
लगभग 90 वर्षीय सज्जनबाई को रतलाम जिला अस्पताल में गंभीर घावों और अत्यधिक शुगर की हालत में पाया गया। अस्पताल चौकी प्रभारी अशोक शर्मा ने मानवता का परिचय देते हुए तत्काल समाजसेवी गोविंद काकानी से संपर्क किया, जिन्होंने तुरंत एसडीएम और सामाजिक न्याय विभाग से समन्वय कर महिला को वृद्धाश्रम विरीयाखेड़ी में भर्ती करवाया।
वृद्धाश्रम में देखभाल से स्वास्थ्य में सुधार
29 जून 2025 को सज्जनबाई वृद्धाश्रम में भर्ती हुईं, जहाँ नियमित इलाज और देखभाल से उनकी तबीयत में सुधार हुआ। उन्होंने अन्य वृद्धजनों से दोस्ती कर ली, मगर अपने परिवार की यादें उन्हें बेचैन करती रहीं।

जब रतलाम बुजुर्ग महिला को परिवार मिला, भावनाएं छलकीं
कुछ समय बाद, उनका बेटा बाबूलाल परमार और नातिन राकेश मकवाना उन्हें खोजते हुए जिला अस्पताल पुलिस चौकी पहुँचे। समाजसेवी गोविंद काकानी के सहयोग से उन्हें बताया गया कि सज्जनबाई वृद्धाश्रम में हैं। निर्धारित समय पर जब परिजन वहां पहुँचे, तो माँ-बेटे का भावुक मिलन देखने लायक था। सज्जनबाई ने कहा, “मुझे जल्दी घर ले चलो।”
परिजनों ने जताया आभार
बेटे बाबूलाल परमार ने बताया कि सज्जनबाई (पत्नी वर्दीचंद परमार) ग्राम चिरोला, तहसील बड़नगर, जिला उज्जैन की निवासी हैं और वर्तमान में मोती नगर, रतलाम में किराये के मकान में रह रहे थे। बीमारी और स्मृति कमजोर होने की वजह से वे इलाज के लिए अकेले निकल जाती थीं और रास्ता भूल जाती थीं।
परिवार ने इस नेक कार्य के लिए समाजसेवी गोविंद काकानी, प्रधान आरक्षक अशोक शर्मा और प्रशासन के सभी जिम्मेदारों का आभार प्रकट किया।


