शिक्षकों की भारी कमी उजागर, केंद्र ने दिया दिसंबर तक भरने का निर्देश
मध्य प्रदेश में शिक्षक संकट गहराता जा रहा है। राज्य सरकार द्वारा केंद्र को सौंपी गई वार्षिक कार्य योजना रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि प्रदेश में शिक्षकों के 50,000 से अधिक पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने निर्देश दिया है कि राज्य इन पदों को दिसंबर 2025 तक भरने की प्रक्रिया (MP Teacher Bharti) पूरी करे।
इससे पहले, मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (MPESB) ने वर्ष 2025 की शुरुआत में 10,000 से अधिक पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की थी, जो बाद में मार्च में भी आगे बढ़ाई गई। बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है, लेकिन अब राज्य में शिक्षकों की भारी कमी के चलते सरकार पर एक व्यापक और तेज़ भर्ती अभियान शुरू करने का दबाव है।
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47 हजार पद सिर्फ प्राथमिक स्कूलों में खाली, कई स्कूलों में सिर्फ एक शिक्षक
राज्य सरकार की रिपोर्ट के मुताबिक, खाली पड़े शिक्षकों के कुल 50,000 पदों में से 47,122 पद सिर्फ प्राथमिक विद्यालयों में हैं। इसके अलावा माध्यमिक विद्यालयों में 2,877 और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में 2,022 पद खाली हैं।
चौंकाने वाली बात यह है कि राज्य के 12,000 से ज्यादा स्कूल सिर्फ एक शिक्षक के सहारे संचालित हो रहे हैं। वर्तमान में 9,620 प्राथमिक और 2,590 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में सिर्फ एक-एक शिक्षक कार्यरत हैं, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा क्रमशः 12,337 और 3,290 था।
इसके अलावा, राज्य के 1,23,412 स्कूलों में से 23,087 स्कूल ऐसे हैं, जहां छात्र संख्या 30 से भी कम है। 2022-23 में यह संख्या 21,810 थी। उच्च प्राथमिक स्तर पर भी 1,367 स्कूलों में 30 से कम छात्र हैं, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 1,224 था।
निष्कर्ष:
मध्य प्रदेश में शिक्षकों की भारी कमी ने शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित किया है। अब केंद्र सरकार के निर्देश के बाद उम्मीद की जा रही है कि राज्य सरकार दिसंबर 2025 तक इस संकट को दूर करने के लिए एक व्यापक और तेज़ MP Teacher Bharti अभियान चलाएगी।


