मध्यप्रदेश (MP News)। प्रदेश की पंचायतों में भ्रष्टाचार की कहानियां थमने का नाम नहीं ले रही हैं। ताजा मामला जिले की भाटिया ग्राम पंचायत का है, जिसने एक बार फिर सरकारी धन के दुरुपयोग और लापरवाही की पोल खोल दी है। यहां आंगनबाड़ी भवन निर्माण के लिए खरीदी गई 2500 ईंटों का बिल 1.25 लाख रुपये का बनाया गया। जबकि हकीकत यह है कि इन ईंटों की असली कीमत महज 12,500 रुपये होती है।
यह पूरा मामला तब सुर्खियों में आया जब पंचायत द्वारा तैयार किया गया यह बिल सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वायरल दस्तावेज में सरपंच और सचिव दोनों के हस्ताक्षर मौजूद हैं। जैसे ही यह जानकारी ग्रामीणों और प्रशासन तक पहुंची, जिले भर में चर्चा शुरू हो गई और कलेक्टर ने तत्काल एसडीएम को जांच के आदेश जारी किए।
फर्जी बिल और भुगतान पर उठे सवाल
जानकारी के मुताबिक, भाटिया पंचायत ने आंगनबाड़ी भवन के लिए ईंट खरीदी का बिल ईंट सप्लायर चेतन प्रसाद कुशवाहा के नाम पर तैयार किया। पंचायत के दस्तावेजों में यह साफ लिखा है कि 2500 ईंटें पांच रुपये नग के हिसाब से खरीदी गई हैं। यानी कुल राशि 12,500 रुपये बनती है। लेकिन बिल में हेरफेर कर रकम 1,25,000 रुपये लिख दी गई। हैरानी की बात यह है कि इस फर्जी बिल का भुगतान भी सप्लायर को कर दिया गया है।
जब पंचायत सरपंच से इस घोटाले पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने टिप्पणी करने से साफ इनकार कर दिया। पंचायत सचिव से भी संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे बातचीत नहीं हो पाई। इस चुप्पी ने संदेह और गहरा कर दिया है।

स्थानीय ईंट व्यापारी लालन मिश्रा का कहना है कि जिले में ईंटों की कीमत सामान्यत: 4 से 10 रुपये प्रति नग होती है। ऐसे में 1.25 लाख रुपये का बिल पूरी तरह से फर्जी और भ्रष्टाचार का उदाहरण है। ग्रामीणों का कहना है कि यह सिर्फ एक मामला नहीं है, बल्कि पंचायतों में चल रहे भ्रष्टाचार की एक झलक है।
प्रशासन हरकत में, ग्रामीणों का बढ़ता गुस्सा
सोशल मीडिया पर मामला वायरल होते ही कलेक्टर डॉ. केदार सिंह ने इसे गंभीरता से लिया और एसडीएम को मौके पर भेजकर जांच कराने का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अगर भ्रष्टाचार की पुष्टि होती है तो दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी जोड़ा कि सरकारी धन का दुरुपयोग किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
ग्रामीण इस घोटाले से बेहद नाराज हैं। उनका कहना है कि पंचायतों में भ्रष्टाचार की वजह से न केवल सरकारी खजाने को नुकसान होता है, बल्कि आम लोगों को योजनाओं का सही लाभ नहीं मिल पाता। आंगनबाड़ी भवन, सड़कें और अन्य विकास कार्य भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाते हैं। लोगों का आरोप है कि जब तक प्रशासन कार्रवाई में सख्ती नहीं दिखाएगा, तब तक पंचायतें इस तरह फर्जी बिल बनाकर पैसों की लूट करती रहेंगी।
इससे पहले भी जिले की पंचायतों में ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं। हाल ही में एक पंचायत ने दो फोटो कॉपी का बिल 4000 रुपये का पास किया था। वह मामला भी सोशल मीडिया पर चर्चा में आया था, लेकिन कार्रवाई कागजों तक ही सीमित रह गई। यही कारण है कि ग्रामीणों को इस बार भी जांच पर भरोसा नहीं है। उनका कहना है कि जब तक दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक भ्रष्टाचार की जड़ें और मजबूत होती जाएंगी।


