रतलाम जिले के जावरा स्थित विश्वप्रसिद्ध हुसैन टेकरी शरीफ में हजरत इमाम हुसैन की याद में आयोजित दस दिवसीय चेहल्लूम का मुख्य आकर्षण — आग पर मातम (खंदक बरपा) — गुरुवार 14 अगस्त की रात 10 बजे से शुरू होगा। गुरुवार सुबह से ही श्रद्धालुओं का आना जारी है और अब तक 35 हजार से अधिक लोग पहुंच चुके हैं, जबकि अनुमान है कि रात तक यह संख्या एक लाख पार कर जाएगी।
धार्मिक कार्यक्रमों की श्रृंखला
बीते 10 दिनों से प्रतिदिन धार्मिक आयोजन और जुलूस हो रहे हैं। 13 अगस्त को हजरत अबुल फजलिल अब्बास (अ) के अलम मुबारक की सवारी अमारी का जुलूस निकाला गया। दोपहर में खंदक स्थल के पास सामूहिक लोबान कार्यक्रम और शाम को छोटे रोजे से चुप ताजिये का जुलूस निकाला गया, जिसका समापन मेहंदी कुएं पर हुआ। रात 9 बजे गरीबां का मंजर पेश किया गया।
खंदक बरपा की परंपरा
रात 10 बजे से शुरू होने वाले आग पर मातम में पहले शिया समुदाय के चयनित 21-21 दूल्हे अंगारों पर चलेंगे, फिर पुरुष और महिलाएं चूल पार करेंगे। रात 12 बजे से आम श्रद्धालुओं का चूल पर चलना शुरू होगा, जो अगले दिन सुबह तक जारी रहेगा। परंपरा के अनुसार, दूल्हों का चयन लॉटरी पद्धति से होता है। इस बार चार चूल तैयार की गई हैं।

बारिश से चुनौती
गुरुवार सुबह से जावरा और आसपास के क्षेत्रों में बारिश हो रही है, जिससे ठहरे श्रद्धालुओं और दुकानदारों को दिक्कत हुई। कई ने डोम व शेड में शरण ली, जबकि कई का सामान भीग गया।
सुरक्षा और व्यवस्थाएं
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस-प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए हैं।
- 500+ पुलिसकर्मी और अधिकारी
- 250+ नगर सुरक्षा समिति सदस्य व चौकीदार
- 200+ प्रशासनिक कर्मचारी
पूरे परिसर में CCTV कैमरे, 10 बड़े डोम और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
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आस्था का केंद्र
हुसैन टेकरी शरीफ में चेहल्लूम का आयोजन 1942 से हो रहा है। संस्थापक मरहूम यूसुफ भाई मुकादम द्वारा शुरू की गई इस परंपरा को अब उनके पुत्र अफजल मुकादम और हुसैनी मिशन संभाल रहे हैं। यहां शिया, सुन्नी, हिंदू और अन्य धर्मों के लोग भी बड़ी संख्या में शामिल होते हैं। 2012 में भीड़ में भगदड़ से 12 लोगों की मौत के बाद टीन शेड की जगह टेंट और डोम का इस्तेमाल शुरू हुआ।


